माँ का वो रूप जिसमे स्वयं माँ ने अपने शीश को काट दिया है और अपने मस्तक को छिन्न करने के कारण यह माँ छिन्न मस्तिका कहलाई यह माँ के दस महाविद्याओ में से एक है | उनकी गर्दन से लहू की तीन धार निकल रही है जो उनके दोनों और सहचरी और स्वयं पान कर रही है | देवी माँ के पैरो में कामदेव और रति पड़े हुए है